प्राथमिक उपचार (First Aid) | परिभाषा, 3C सिद्धांत, ABC और कृत्रिम श्वास विधियाँ

1
प्राथमिक उपचार (First Aid) वह त्वरित और अस्थायी सहायता है, जो किसी व्यक्ति को अचानक चोट, दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में डॉक्टर के पास पहुँचने से पहले दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य रोगी की जान बचाना, स्थिति को बिगड़ने से रोकना और उसे सुरक्षित अवस्था में रखना होता है। ताकि गोल्डन समय रहते कोई डॉक्टर आकर स्थिति को संभाल सके।

First Aid में ABC नियम क्या है?


प्राथमिक उपचार क्या होता है? (First Aid in Hindi)


"किसी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति का डॉक्टर के आगमन से पूर्व किया जाने वाला उपचार प्राथमिक उपचार कहलाता है।"
प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया भिन्न–भिन्न हो सकती है ये इस बात पर निर्भर करेगा की पीड़ित व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त किससे हुआ है जैसे बिजली का झटका, सड़क दुर्घटना, साप का काटना इत्यादि।
प्राथमिक उपचार के लिए कार्यशाला में फर्स्ट एड बॉक्स (First Aid Box), स्ट्रेचर आदि वस्तुएं उपलब्ध होनी चाहिए।
First Aid in Hindi | प्राथमिक उपचार के सिद्धांत, उद्देश्य और कृत्रिम श्वास विधि
First aid in hindi

किसी व्यक्ति को विद्युत का झटका लगने के पश्चात तुरन्त डॉक्टर को बुलाना चाहिए और तब तक पीड़ित को निम्न प्राथमिक उपचार देना चाहिए—

1. यदि पीड़ित के चारो ओर भीड़ हो तो उसे तुरन्त हटा देना चाहिए जिससे की पीड़ित को स्वच्छ हवा मिल सके।
2. यदि पीड़ित के मुंह में नकली दांत, तम्बाकू, पान मसाला या किसी भी प्रकार का खाने का कुछ समान हो तो उसे तुरन्त निकाल देना चाहिए।
3. पीड़ित के छाले अथवा जले हुए अंगो को साफ कपड़े या कागज से ढक देना चाहिए जिससे की उस स्थान पर मच्छर, मक्खी ना बैठे और पीड़ित को किसी अन्य तरह की परेशानी ना हो।
4. पीड़ित यदि किसी बंद कमरे में हो तो घर के दरवाजे और खिड़कियां खोल देना चाहिए जिससे की पीड़ित व्यक्ति तक स्वच्छ हवा पहुंच सके और पीड़ित को किसी तरह की सांस लेने में कठिनाई ना हो।
5. यदि सर्दी का मौसम हो तो पीड़ित को सर्दी से बचाना चाहिए उसे किसी पलंग, चटाई पर कम्बल से ढककर लिटाना चाहिए और इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पीड़ित व्यक्ति का मुंह न ढका हो।
6. पीड़ित को यदि श्वास लेने में दिक्कत हो रही हो तो कृत्रिम श्वास क्रिया विधियों का प्रयोग करना चाहिए।

📑 Table of Contents


प्राथमिक उपचार के सिद्धान्त (Principle of First Aid)


प्राथमिक उपचार का 3C सिद्धांत आपात स्थिति में सही और सुरक्षित सहायता देने का एक सरल तरीका है। इसमें Check (जाँच करना), Call (मदद के लिए बुलाना) और Care (देखभाल करना) शामिल है। यह सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि घायल व्यक्ति को बिना जोखिम के समय पर और उचित प्राथमिक उपचार मिल सके।
प्राथमिक उपचार के सिद्धान्त को 3C कहा जाता है जहा 3C का अर्थ Check, Call और Care होता है। इसके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।

1. जांच (Check): प्राथमिक उपचार का प्रथम सिद्धांत यह है की सबसे पहले हमे व्यक्ति की जांच करनी चाहिए की व्यक्ति जिन्दा है या व्यक्ति की मृत्यु हो गई है।

2. कॉल (Call): व्यक्ति की जांच करने के बाद हमे सहायता के लिए किसी डॉक्टर या एम्बुलेंस को फोन (कॉल) करना चाहिए।

3. केयर (Care): प्राथमिक उपचार का तीसरा सिद्धांत कहता है की एम्बुलेंस या डॉक्टर के आने तक पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करना चाहिए और अगर सम्भव हो तो डॉक्टर के आने तक पीड़ित व्यक्ति का प्राथमिक उपचार करना चाहिए।

प्राथमिक उपचार के उद्देश्य (Purpose of First Aid)


प्राथमिक उपचार के उद्देश्य 3P (Preserve Life, Prevent Deterioration, Promote Recovery) होते हैं।
इनका मुख्य उद्देश्य घायल या बीमार व्यक्ति की जान बचाना, उसकी स्थिति को और बिगड़ने से रोकना तथा शीघ्र स्वस्थ होने में सहायता करना है। 3P सिद्धांत प्राथमिक उपचार को सही, सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद करता है।
प्राथमिक उपचार के 3P उद्देश्य थे परन्तु वर्तमान में प्राथमिक उपचार के 5P उद्देश्य माना जाता है।

3P के सभी शब्दों का अर्थ = Perserve Life, Prevent Deterioration, Promote Recovery

वर्तमान में प्राथमिक उपचार के 5P उद्देश्य है।

5P के सभी शब्दों का अर्थ = Perserve Life, Prevent Deterioration, Promote Recovery, Pain Relif, Protect the Uncousious

1. जीवन बचाए (Perserve Life): घटना के बाद पीड़ित व्यक्ति की स्थिति न बिगड़े या जान जाने की संभावना न बने ऐसा ध्यान में रखते हुए तुरन्त सही चिकित्सा देना चाहिए।

2. चोट रोकने का प्रयास (Prevent Deterioration): पीड़ित व्यक्ति के चोट को रोकने का प्रयास करना चाहिए जिससे की चोट आगे न बढ़े।

3. चोट को रिकवर करे (Promote Recovery): कुछ इस प्रकार से व्यवस्था करे की चोट को जल्द से जल्द रिकवर किया जा सके।

4. दर्द से राहत (Pain Relif): दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति को दर्द से राहत के लिए उपाय करे। जैसे की ज्यादा खून निकल रहा हो तो उसे किसी साफ कपड़े से बांध दे और पेन किलर के लिए व्यक्ति को कुछ दवा दे।

5. न होने वाला हो उसे रोके (Protect the Uncousious): जो न होने वाला हो उसे रोकने का प्रयास करे।

प्राथमिक उपचार में ABC क्या होता है? (What is ABC in First Aid)


प्राथमिक उपचार में ABC जीवन रक्षक सहायता का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसमें A – Airway (श्वास मार्ग खोलना), B – Breathing (साँस की जाँच करना) और C – Circulation (रक्त संचार जाँचना) शामिल है। इस क्रम का पालन करके आपात स्थिति में व्यक्ति की जान बचाने के लिए तुरंत और सही कदम उठाए जाते हैं। प्राथमिक उपचार में जो प्रथम कदम उठाया जाता है उसे ABC कहा जाता है।
प्राथमिक उपचार में A का अर्थ: A – Airway (श्वास मार्ग) सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति का श्वास मार्ग खुला हो, ताकि हवा आसानी से फेफड़ों तक पहुँच सके। इसलिए पहले श्वसन नली की जांच करे की श्वसन नली खुली है अथवा नहीं।

प्राथमिक उपचार में B का अर्थ: B – Breathing (साँस) इसके बाद जाँच की जाती है कि व्यक्ति साँस ले रहा है या नहीं और साँस सामान्य है या नहीं। इसलिए व्यक्ति का श्वास मार्ग चेक करने के बाद जांच करे की पीड़ित व्यक्ति की सांसे अच्छी तरह से चल रही है अथवा नहीं अगर व्यक्ति को सांस लेने में समस्या हो तो हमे कृत्रिम श्वास विधि का प्रयोग करना चाहिए। कृत्रिम श्वास की क्रियाविधि के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।

प्राथमिक उपचार में C का अर्थ: C – Circulation (रक्त संचार) अंत में रक्त संचार की स्थिति देखी जाती है, जैसे नाड़ी चल रही है या नहीं और अधिक रक्तस्राव तो नहीं हो रहा। अंतिम चरण में रक्त स्राव की जांच करनी चाहिए यदि रक्त स्राव हो रहा हों तो रक्तस्राव बंद करने का प्रयास करना चाहिए।

कृत्रिम श्वास की कौन–कौन सी विधियां है? (Artificial Respiration Method)


कृत्रिम श्वास क्रिया विधि वह आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसमें साँस न ले पा रहे व्यक्ति को बाहर से हवा देकर श्वसन को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य ऑक्सीजन की आपूर्ति जारी रखना और व्यक्ति की जान बचाना होता है, जब तक वह स्वयं साँस न लेने लगे या चिकित्सकीय सहायता और ऑक्सीजन सिलेण्डर न मिल जाए।
कृत्रिम श्वास क्रिया की प्रमुख जो ज्यादातर उपयोग में लाई जाती है उनके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।

1. सिल्वेस्टर विधि (Sylvester method)
2. शैफर विधि (Schaffer's method)
3. मुंह से मुंह में हवा भरना (Mouth to mouth resuscitation method)
4. मुंह से नाक में हवा भरना (Mouth to nose method)

सिल्वेस्टर विधि (Sylvester method in hindi): विद्युत झटके के पश्चात कृत्रिम श्वास की सिल्वेस्टर विधि में रोगी को पीठ के बल लिटाया जाता है। इस विधि में पीड़ित को पीठ के बल लिटा कर पीठ के नीचे तकिया लगा दिया जाता है जिससे की उसका सीना कुछ ऊपर उठ जाए और सिर कुछ नीचे हो जाए इस विधि का प्रयोग तब किया जाता है जब पीड़ित के सीने की ओर छाले पड़े हो।

प्रथम स्थिति (First Position): पीड़ित के सिर के पास व्यक्ति को अपने घुटनो के बल बैठ जाना चाहिए और इसके पीड़ित के दोनो हाथो की आधी मुठ्ठी बांधकर हाथो को सीधा फैला देना चाहिए अब पीड़ित के दोनो हाथो को मोड़कर धीरे-धीरे उसके सीने पर लाना चाहिए।
Sylvester विधि कैसे दी जाती है?

द्वितीय स्थिति (Second Position): प्रथम स्थिति में अपने हाथो से पीड़ित के सीने पर कुछ दबाव डाले 2–3 सेकंड बाद दबाव हटा ले और पीड़ित के हाथो को उसके सिर की ओर फैला दे और मुट्ठियां खोल दे।
Respiration Sylvester Method In Hindi

इस क्रिया विधि को 10–12 बार प्रति मिनट की दर से तब तक दोहराना चाहिए जब तक श्वास क्रिया सामान्य न हो जाए।

जब पीड़ित के सीने पर दबाव डाला जाता है तो फेफड़ों के अंदर की हवा बाहर निकल जाती है और दबाव हटाने से बाहर की ताजी हवा फेफड़ों के अन्दर जाती है इस प्रकार पीड़ित को श्वास लेने में सहायता मिलती है।

शैफर विधि (Schaffer's Method In Hindi): विद्युत झटके के पश्चात कृत्रिम श्वास की शैफर विधि में रोगी को छाती/पेट के बल लिटाया जाता है। इस विधि में पीड़ित को पेट के बल लिटा कर उसके सिर को किसी एक करवट कर दिया जाता है और पीड़ित के सीने के नीचे पतला तकिया रख दिया जाता है इस विधि का प्रयोग तब किया जाता है जब पीड़ित के पीठ पर छाले पड़े हो।

प्रथम स्थिति (First Position): पीड़ित के घुटनो के पास अपने घुटनो के बल बैठ जाए अपने दोनो हाथ पीड़ित की पीठ पर इस प्रकार रखे की दोनो हाथ सीधे रहे और चारो उंगलियां आपस में मिली रहे और वे अंगूठे से समकोण बनाएं।
Schaffer's विधि क्या है?
Schaffer's method

द्वितीय स्थिति (Second Position): इस स्थिति में आगे की ओर झुकते हुए पीड़ित की पीठ पर भार डाले 2-3 सेकंड बाद दबाव को हटा ले और अपने दोनो हाथों को सीधा कर दे।
Schaffer's Method Kya Hota Hai

इस क्रिया विधि को 10-12 बार प्रति मिनट की दर से तब तक दोहराना चाहिए जब तक कि पीड़ित व्यक्ति की श्वास क्रिया सामान्य ना हो जाए। जब पीड़ित की पीठ पर दबाव डाला जाता है तो फेफड़ों के अन्दर की वायु बाहर निकल जाती है और दबाव हटाने से बाहर की स्वच्छ हवा फेफड़ों के अन्दर जाती है और इस तरह से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में सहायता मिलती है।

मुंह से मुंह में हवा भरना (Mouth To Mouth Respiration Method In Hindi): मुंह से मुंह में हवा भरने की विधि में पीड़ित को पीठ के बल लिटा लेना चाहिए पीड़ित को लिटाने के बाद पीड़ित के पीठ के नीचे तकिया लगा दे जिससे की उसका मुंह थोड़ा पीछे की ओर लटक जाए इसके बाद पीड़ित व्यक्ति का मुंह अच्छी तरह से साफ कर ले अब उसके खुले मुंह पर महीन कपड़ा रखकर और एक हाथ से उसकी नाक बंद करके अपने मुंह से उसके मुंह में बलपूर्वक झटके से हवा भरे। यह ध्यान रखें कि हवा बाहर ना निकलने पाए और उसके फेफड़े कुछ फूले इसके बाद हवा को बाहर निकलने देने के लिए अपना मुंह हटा ले।
Mouth To mouth Respiration Method In Hindi

उपरोक्त क्रिया 10-12 बार प्रति मिनट की दर से तब तक दोहराते रहना चाहिए जब तक की उसकी श्वास क्रिया सामान्य ना हो जाए। बलपूर्वक झटके से हवा भरते समय पीड़ित के फेफड़े फूलते है और ताजी हवा अंदर जाती है मुंह हटा लेने पर अन्दर की हवा बाहर निकल जाती है इस प्रकार पीड़ित को श्वास लेने में सहायता मिलती है।

मुंह से नाक में हवा भरना (Mouth to nose method in hindi): इस विधि में पीड़ित व्यक्ति के नाक में किसी अन्य व्यक्ति के मुंह द्वारा हवा भरा जाता है। मुंह से नाक में हवा भरने की विधि को सबसे उपयुक्त विधि माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है की नाक से सांस लेने पर हवा पूरे शरीर में आसानी से चला जाता है। और एक स्वस्थ व्यक्ति सदैव नाक के माध्यम से ही सांस लेता है।

विद्युत झटका लगने की गंभीरता किस बात पर निर्भर करती है?


विद्युत झटका लगने की गंभीरता कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे विद्युत धारा की तीव्रता, शरीर में धारा के प्रवाह की अवधि, प्रवेश का मार्ग तथा व्यक्ति की शारीरिक स्थिति। इन बातों के अनुसार झटका हल्का भी हो सकता है और जानलेवा भी। लेकिन विद्युत झटका लगने की गंभीरता मुख्य रूप से इन 3 कारकों पर निर्भर करती है।

1. धारा का मान (Value of current): विद्युत धारा की कितनी मात्रा पीड़ित व्यक्ति को लगी है।
2. समय (Value of Time): विद्युत धारा की मात्रा कितने समय तक व्यक्ति के शरीर में से प्रवाहित होती रही।
3. वोल्टेज (Voltage): कितना वोल्टेज का झटका लगा है।

ध्यान रखने योग्य बाते:
1. 90V से अधिक वोल्टेज पर विद्युत का झटका लगता है।
2. शरीर जब शुष्क अवस्था में हो तब 100kΩ–600kΩ तक का प्रतिरोध माना जाता है।

First Aid से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


Que1. प्राथमिक उपचार क्या है?
प्राथमिक उपचार वह तत्काल और अस्थायी सहायता है जो किसी दुर्घटना, चोट या अचानक बीमारी की स्थिति में डॉक्टर के पहुँचने से पहले दी जाती है।

Que 2. प्राथमिक उपचार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
प्राथमिक उपचार का मुख्य उद्देश्य 3P सिद्धांत पर आधारित होता है, जिसका अर्थ होता है—
जान बचाना (Preserve Life)
स्थिति को बिगड़ने से रोकना (Prevent Deterioration)
स्वस्थ होने में सहायता करना (Promote Recovery)

Que 3. प्राथमिक उपचार कब दिया जाता है?
जब कोई व्यक्ति चोटिल हो जाए, बेहोश हो जाए, खून बह रहा हो, जल गया हो, बिजली का झटका लगा हो या फिर सांस लेने में परेशानी हो, तब प्राथमिक उपचार दिया जाता है।

Que 4. प्राथमिक उपचार कौन दे सकता है?
प्राथमिक उपचार कोई भी सामान्य व्यक्ति दे सकता है, बशर्ते उसे बुनियादी जानकारी और सावधानी का ज्ञान होना चाहिए।

Que 5. प्राथमिक उपचार में 3C का क्या अर्थ है?
प्राथमिक उपचार में 3C का अर्थ है—
Check (स्थिति जाँचें)
Call (मदद बुलाएँ / एम्बुलेंस कॉल करें)
Care (उचित देखभाल करें)

Que 6. प्राथमिक उपचार बॉक्स में क्या-क्या होना चाहिए?
प्राथमिक उपचार बॉक्स में सामान्यतः ये वस्तुएँ होती हैं:
पट्टी और बैंडेज
डेटॉल
कॉटन और गॉज
कैंची
दस्ताने
दर्द निवारक दवा

Que 7. क्या प्राथमिक उपचार डॉक्टर का विकल्प है?
नहीं,
प्राथमिक उपचार डॉक्टर का विकल्प नहीं बल्कि डॉक्टर तक पहुँचने से पहले की सहायता है जिसे कोई भी जानकार व्यक्ति कर सकता है।

Que 8. प्राथमिक उपचार देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
स्वयं को सुरक्षित रखें।
घबराएँ नहीं।
घायल को अनावश्यक हिलाएँ नहीं।
गंभीर स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता बुलाएँ।

Que 9. क्या गलत प्राथमिक उपचार नुकसान पहुँचा सकता है?
हाँ,
गलत तरीके से दिया गया प्राथमिक उपचार स्थिति को और बिगाड़ सकता है, इसलिए केवल सही और सुरक्षित उपाय ही करें।

Que 10. प्राथमिक उपचार क्यों आवश्यक है?
क्योंकि यह गोल्डन समय में दी गई सहायता होती है, जो किसी की जान को बचा सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)


प्राथमिक उपचार एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है, जो आपात स्थिति में व्यक्ति की जान बचाने, हालात को बिगड़ने से रोकने और शीघ्र स्वस्थ होने में मदद करती है। इसकी सही जानकारी हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

CTA (Call To Action)


प्राथमिक उपचार से जुड़ी पूरी जानकारी और आसान तरीके सीखने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत सही कदम उठाएँ।
उपयोगी जानकारी के लिए इस पोस्ट को शेयर करें और वेबसाइट को फॉलो करें। ताकि आप हमारी लेटेस्ट पोस्ट देख पाए और हमसे जुड़े रहे।

अन्य महत्वपूर्ण टॉपिक:

Post a Comment

1 Comments

Please do not enter any spam link in the comment box. All the comments are Reviewed by Admin.

Post a Comment

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top