Underground Cable (UG Cable) – संरचना, लाभ, हानियाँ और उपयोग।

3
Underground Cable वह विद्युत केबल होती है जिसे जमीन के नीचे बिछाकर बिजली की आपूर्ति की जाती है। इसमें कंडक्टर, इंसुलेशन, स्क्रीनिंग और बाहरी सुरक्षा परतें होती हैं, जो केबल को नमी, मिट्टी, दबाव और यांत्रिक क्षति से सुरक्षित रखती हैं। आजकल शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों, मेट्रो रेल, एयरपोर्ट और हाई-वोल्टेज सप्लाई में UG Cable का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि यह Overhead Lines की तुलना में अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और देखने में साफ-सुथरी होती है।
Underground Cable सिस्टम में तार खुले वातावरण में नहीं होते, इसलिए आंधी, बारिश, पेड़ गिरने या बाहरी टकराव से बिजली आपूर्ति बाधित होने की संभावना बहुत कम रहती है। इसी कारण आधुनिक बिजली वितरण प्रणाली में Underground Cabling को प्राथमिकता दी जा रही है।

UG cable showing internal conductors and layers used for safe underground power distribution


अंडरग्राउंड केबल (UG Cable) क्या है?


UG केबल वह विद्युत केबल होती है जिसे जमीन के नीचे बिछाकर बिजली की सप्लाई दी जाती है। यह केबल इंसुलेटेड होती है और नमी, मिट्टी तथा बाहरी नुकसान से सुरक्षित रहती है। शहरों, फैक्ट्रियों और आधुनिक बिजली वितरण प्रणाली में UG केबल का उपयोग अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय सप्लाई के लिए किया जाता 
पावर ट्रांसमिशन या डिस्ट्रीब्यूशन को दो विधियों से किया जाता है। ओवरहेड लाइन और अंडरग्राउंड केबल आज इस लेख में हम UG केबल के बारे में समझेंगे।

(1) ओवरहेड लाइन (Overhead Line)
(2) अंडरग्राउंड केबल (Under Ground Cable)

📑 Table of Contents


UG cable chart showing UG cable structure and insulation used in ITI electrician studies



केबल: "अलग-अलग तार जिनमे सब पर अपना अलग-अलग इंसुलेशन (Insulation) हो तथा इन सब का एक संयुक्त इंसुलेशन लगा दिया जाता है उसे केबल कहते है।"
एक अंडरग्राउंड केबल की मुख्य विशेषता यह होती है की यह प्रेशर को सहन कर सकती है इसलिए इसे आसानी से भूमि में बिछा सकते है।

एक अंडरग्राउंड केबल के अन्दर जितनी तार होती है, उतना ही उसमे कोर (Core) कहलाता है। केबल सिंगल कोर (Single core), थ्री कोर (Three core) या मल्टीकोर (Multi core) हो सकती है।
सामान्यतः केबल में दो या उससे अधिक चालक (Conductor) रखे जाते है, प्रत्येक चालक के लिए अलग इंसुलेशन होता है।

अंडरग्राउंड केबल के लाभ (UG Cable Advantage)


UG केबल के कई महत्वपूर्ण लाभ होते हैं। यह केबल जमीन के नीचे होने के कारण मौसम, हवा, बारिश और पेड़ों से होने वाले नुकसान से सुरक्षित रहती है। इससे बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और बिना रुकावट बनी रहती है, इसलिए आधुनिक शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में UG केबल को प्राथमिकता दी जाती है।
एक UG केबल को लगाने से निम्नलिखित लाभ होता है:

1. मेंटेनेंस कम – UG केबल को बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती। UG केबल का अनुरक्षण लागत (Maintenance cost) ओवरहेड लाइन की तुलना में कम होता है।
2. ज्यादा सुरक्षा – खुले तार नहीं होने से करंट लगने और दुर्घटना का खतरा कम होता है। अंडरग्राउंड केबल तड़ित और आंधी/तूफान से सुरक्षित रहता है। UG केबल पर मौसम का असर नहीं होता है। बारिश, आंधी, तूफान या बर्फ से प्रभावित नहीं होती।
3. कम फॉल्ट – ओवरहेड लाइन की तुलना में खराबी बहुत कम होती है तथा मानव निर्मित हानियां नही होती है।
4. बिजली सप्लाई स्थिर – वोल्टेज फ्लक्चुएशन और ट्रिपिंग कम होती है। अंडरग्राउंड केबल में लाइन लॉस (Line loss) कम होता है अतः वोल्टेज नियंत्रण (Voltage control) आसानी से होता है। क्योंकि उनमें कम इंडक्टिव हानि होती है।
5. बेहतर दिखावट – खंभे और तार न होने से शहर सुंदर और साफ दिखाई देता है। ओवरहेड लाइन की तुलना में स्थान देखने में अधिक अच्छा लगता है।
6. लंबी उम्र – सही तरीके से डाली जाए तो UG केबल कई साल तक चलती है।

अंडरग्राउंड केबल की हानियाँ (UG Cable Disadvantage)


UG केबल की कुछ हानियाँ भी होती हैं। इसकी सबसे बड़ी कमी इसकी अधिक लागत और खराबी होने पर उसे ढूँढना व ठीक करना कठिन होना है। जमीन के नीचे होने के कारण केबल में खराबी आने पर केबल की मरम्मत में समय और खर्च दोनों अधिक लगते हैं, इसलिए इसके रखरखाव में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है।
UG केबल की हानियों के बारे में नीचे जानकारी दी जा रही हैं:

1. कीमत अधिक – अंडरग्राउंड केबल का प्रारम्भिक लागत बहुत अधिक होता है। और अंडरग्राउंड केबल में जोड़ (Joints) लगाने की कीमत भी अधिक होती है।
2. खराबी ढूँढना कठिन – अंडरग्राउंड केबल में दोष (Fault) को ढूंढना आसान नहीं होता है तथा दोष मिल जाने पर दोष को सुधारना भी मुश्किल होता है।
3. अधिक इन्सुलेशन – ओवरहेड लाइन की तुलना में अंडरग्राउंड केबल में अधिक इंसुलेशन की आवश्यकता होती है।
4. अधिक लागत – UG केबल की स्थापना और सामग्री ओवरहेड लाइन की तुलना में महंगी होती है।
5. एक्सपेंशन कठिन – भविष्य में नई लाइन जोड़ना या क्षमता बढ़ाना आसान नहीं होता।
6. लोड क्षमता सीमित – अधिक करंट बहाने पर केबल जल्दी गर्म हो सकती है।
7. मरम्मत में समय लगता है – खराबी आने पर खुदाई करनी पड़ती है, जिससे सप्लाई देर से चालू होती है।

ये सभी हानियाँ बताती हैं कि UG केबल सुरक्षित तो होती है, लेकिन रखरखाव और लागत की दृष्टि से सावधानी जरूरी होती है।

UG केबल का उपयोग कहां किया जाता है?


UG केबल (Underground Cable) का उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ बिजली सप्लाई को सुरक्षित, स्थिर और बिना रुकावट देना जरूरी होता है। यह केबल जमीन के नीचे डाली जाती है, इसलिए बाहरी नुकसान से बची रहती है।

1. घनी आबादी वाले शहरों में – जहाँ खुले बिजली के तार लगाने के लिए जगह नहीं होती। अंडरग्राउंड केबल का उपयोग उस स्थान पर ज्यादा करना चाहिए जहा घनी आबादी क्षेत्र या संकरा क्षेत्र होता है।
2. रेजिडेंशियल कॉलोनी और हाउसिंग सोसायटी में – ताकि लोगों को बिजली से खतरा न हो और जगह सुंदर दिखे।
3. हाई-लोड वाले क्षेत्रों में – जहाँ लगातार और स्थिर बिजली सप्लाई जरूरी होती है।
4. जेनरेशन स्टेशन में – UG केबल का उपयोग जेनरेशन स्टेशन (Generating Station) में किया जाता है।
5. सब-स्टेशन में – अंडरग्राउंड केबल का उपयोग सब-स्टेशन (Sub Station) में किया जाता है।
6. औद्योगिक क्षेत्र (Industries) में – जहाँ भारी मशीनों के लिए सुरक्षित बिजली सप्लाई चाहिए।
7. एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और मेट्रो में – जहाँ सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
8. अस्पताल और डाटा सेंटर में – जहाँ बिजली का जाना खतरनाक साबित हो सकता है।
9. जहाँ ओवरहेड लाइन संभव नहीं होती – जैसे पहाड़ी क्षेत्र, संकरी सड़कें या भीड़-भाड़ वाले इलाके।
10. अन्य स्थानों – जहां रखरखाव की स्थितियां ओवरहेड कंस्ट्रक्शन (OH Construction) की अनुमति नहीं देती है।

केबल के लिए आवश्यक शर्ते (Necessity requirements of cables):

1. UG केबल में प्रयुक्त चालक उच्च चालकता (High conductance) तथा उच्च फ्लिसिबिलिटी (High flexibility) का होना चाहिए। 
2. सामान्यतः UG केबल में टिन्ड तांबा (Tinned Copper) या एल्यूमिनियम (Alluminium) चालक का प्रयोग किया जाता है।
3. UG केबल में प्रयुक्त इंसुलेशन उचित मोटाई का होना चाहिए इंसुलेशन की मोटाई ऑपरेटिंग वोल्टेज (Operating voltage) के आधार पर चयन की जाती है।
4. UG केबल में उच्च यांत्रिक सामर्थ्य (High mechanical strength) होना चाहिए तथा केबल में प्रयुक्त पदार्थ रसायनिक क्रिया से मुक्त होना चाहिए क्योंकि मिट्टी में अनेक पदार्थ मौजूद होते है जो केबल के साथ रसायनिक क्रिया कर सकते है।

अंडरग्राउंड केबल की सामान्य संरचना (UG Cable Construction)


UG केबल का कंस्ट्रक्शन इस तरह किया जाता है कि वह जमीन के अंदर लंबे समय तक सुरक्षित, मजबूत और भरोसेमंद बनी रहे। इसमें कई परतें (layers) होती हैं, जो केबल को करंट, नमी, गर्मी, दबाव और मिट्टी के रासायनिक प्रभाव से बचाती हैं। हर परत का अपना अलग काम होता है — जैसे करंट को प्रवाहित करना, इंसुलेशन देना और बाहरी सुरक्षा प्रदान करना।
इस मजबूत संरचना की वजह से UG केबल ओवरहेड लाइन की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित मानी जाती है।
UG केबल में अनिवार्य रूप में एक या एक से अधिक चालक (Conductor) होते है, जो उपयुक्त इंसुलेशन से ढके होते है और सुरक्षा कवचो से घिरे होते है।

Underground cable diagram showing conductor, paper insulation, lead sheath, bedding and armouring


UG केबल के भाग (UG Cable Part)

UG केबल कई अलग-अलग भागों से मिलकर बनी होती है, जो मिलकर इसे सुरक्षित, मजबूत और विश्वसनीय बनाते हैं। हर भाग का अपना एक विशेष कार्य होता है — कोई करंट को प्रवाहित करता है, कोई इंसुलेशन देता है और कोई केबल को नमी, दबाव और बाहरी नुकसान से बचाता है।
इन सभी भागों की सही बनावट और व्यवस्था ही UG केबल को जमीन के अंदर लंबे समय तक सही तरीके से काम करने योग्य बनाती है।
एक अंडरग्राउंड केबल के निम्नलिखित भाग होते है:
1. कोर या चालक (Core or Conductor): केबल का वह भाग जो धारा चालन करता है कोर या चालक कहलाता है।
कोर या चालक टिन्न्ड तांबे (Tinned copper) या एल्यूमिनियम (Alluminium) का बना होता है।
केबल में एक या एक से अधिक चालक हो सकते है यह इस बात पर निर्भर करता है की केबल किस सर्विस (Services) के लिए उपयोग किया जा रहा है जैसे– 3 कोर = फेज सर्विस या 5,7,12 कोर = कंट्रोल केबल

2. इंसुलेशन (Insulation): इंसुलेशन कोर पर प्रयुक्त अचालक परत होती है।
प्रत्येक कोर अथवा कंडक्टर में इंसुलेशन की उपयुक्त मोटाई होती है तहो की मोटाई वोल्टेज की धारकता पर निर्भर रहती है। इंसुलेशन के लिए इम्प्रेगनेट पेपर, वार्निश केमब्रिक की तहो पर पेट्रोलियम जैली लगाई जाती है।

3. धातु कवच (Metallic sheath): धातु कवच कोर को नमी से सुरक्षा देता है।
केबल को भूमि तथा वातावरण में आद्रता, गैस और अन्य हानिकारक द्रव जैसे लेड अथवा आल्कायाइक से बचाने के लिए लेड अथवा एल्यूमिनियम से बना धातु क्वच इंसुलेशन पर लगाया जाता है।
धातु क्वच प्रायः लेड अथवा लेड मिश्रण से बना होता है।

4. कागज का पट्टा (Paper Belt): समूहगत इंसुलेटेड कोर पर इम्प्रेगनेट कागज की तहो को लपेटा जाता है कोर के बीच के खाली स्थान को फिबुअस इंसुलेटिंग पदार्थ (तार आदि) से भरा जाता है।

5. बेडिंग (Bedding): बेडिंग धातु क्वच के ऊपर लगाया जाता है। जिसमे जूट अथवा हेसियन टेप जैसे फिब्रुअस पदार्थ (Materials) होते है। बेडिंग लगाने का उद्देश्य धातु क्वच को जंग से बचाना और आर्मरिंग से होने वाली मैकेनिज्म क्षति से बचाना होता है।

6. आर्मरिंग (Armouring): बेडिंग के ऊपर आर्मरिंग लगाया जाता है। आर्मरिंग का कार्य केबल को यांत्रिक चोट से सुरक्षा प्रदान करना होता है आर्मरिंग सामान्यतः गैलवनाइज्ड स्टील या गैलवनाइज्ड आयरन की होती है। आर्मरिंग सिंगल या डबल हो सकती है कुछ केबलो में आर्मरिंग नही होती है। याद रखे फ्लैक्सिबल केबल में आर्मरिंग नही की जाती है।

7. सर्विंग (Serving): सर्विंग केबल का सबसे अंतिम आवरण होता है।
यह केबल को वायुमंडलीय स्थितिया (धूल, कचरा) से बचाव के लिए होता है। यह सामान्यतः जूट का बना होता है।

याद रखे: बेडिंग, आर्मरिंग और सर्विंग केबल पर कंडक्टर इंसुलेशन को बचाने के लिए ही लगाया जाता है और धातु क्वच को मैकेनिक क्षति से बचाने के लिए लगाया जाता है।

UG केबल में प्रयुक्त इंसुलेशन के गुण (UG Cable Insulation Property)


UG केबल में प्रयुक्त insulation का मुख्य काम कंडक्टर को सुरक्षित रखना और बिजली को बाहर रिसने से रोकना होता है। क्योंकि UG केबल जमीन के नीचे बिछाई जाती है, इसलिए इसका insulation ऐसा होना चाहिए जो नमी, गर्मी, दबाव और रासायनिक प्रभावों को सहन कर सके।
अच्छी गुणवत्ता वाला insulation केबल को शॉर्ट सर्किट, लीकेज और ब्रेकडाउन से बचाता है, जिससे बिजली सप्लाई सुरक्षित और लंबे समय तक स्थिर बनी रहती है।
केबलो का संतोषजनक प्रचालन अधिकतर प्रयुक्त इंसुलेशन की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसलिए इंसुलेशन के लिए उचित पदार्थो का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है।

UG केबल में प्रयुक्त इंसुलेशन सामग्री में निम्न गुण होने चाहिए:

1. उच्च इंसुलेशन प्रतिरोध- इंसुलेशन प्रतिरोध उच्च (High Insulation resistance) होना चाहिए जिससे लीकेज करेंट कम से कम हो।
2. उच्च परावैधुत सामर्थ्य- परावैधुत सामर्थ्य उच्च (High dielectric strength) होना चाहिए ताकि केबल का ब्रेकडाउन न हो।
3. उच्च मैकेनिकल स्ट्रेंथ- यांत्रिक सामर्थ्य उच्च (High mechanical strength) होना चाहिए।
4. नॉन हाइग्रोस्कोप- नॉन हाइग्रोस्कोप (Non Hygroscope) होना चाहिए अर्थात नमी रोधी होना चाहिए इंसुलेशन पदार्थ नमी को सोखने वाला नही होना चाहिए।
5. अज्वलनशील होना चाहिए और रसायनिक क्रिया से मुक्त होना चाहिए।

UG Cable में प्रयुक्त सामग्री


UG Cable को मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए इसमें विभिन्न प्रकार की सामग्री का उपयोग किया जाता है। ये सामग्री केबल को करंट, गर्मी, नमी, मिट्टी के दबाव और रासायनिक प्रभावों से बचाने में मदद करती हैं।
हर सामग्री का अपना विशेष कार्य होता है – कोई बिजली प्रवाहित करती है, कोई इंसुलेशन देती है और कोई बाहरी सुरक्षा प्रदान करती है। इन्हीं सामग्रियों के कारण UG केबल जमीन के अंदर लंबे समय तक सुरक्षित रूप से काम कर पाती है। एक अंडरग्राउंड केबल में इंसुलेशन सामग्री के रूप में निम्न पदार्थ प्रयुक्त होते है:

1. रबर (Rubber): रबर ट्रोपिक पेड़ से निकली सैप से प्राप्त किया जाता है अथवा यह तेल के उत्पादों से बनाया जाता है। इसकी डाइलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ 30KV/mm होती है तथा इसकी इंसुलेशन की प्रतिरोधकता 10^17 होती है।
सामान्यतः इसका प्रयोग नहीं किया जाता है क्योंकि इसमें कुछ कमी है जैसे की यह नमी को सोख लेता है तथा केबल केवल 30°C तापमान ही सहन कर सकती है। यह नरम होता है जिससे सख्त हैंडलिक से क्षति की संभावना होती है और जब प्रकाश के सानिध्यक में आता है तो एज होती है अतः शुद्ध रबर को इंसुलेशन पदार्थ के रूप में प्रयुक्त नही किया जाता है।

2. वल्केनाइज्ड इंडियन रबर (Vulcanised Indian Rubber or V.I.R): यह शुद्ध रबर को जिंक ऑक्साइड, रेड लैड आदि मिनरल पदार्थों में मिलाकर बनाया जाता है और उसमे 3% से 5% सल्फर की मात्रा मिलाई जाती है। इस प्रकार जो मिश्रण तैयार होता है उसको बेलकर पतली चादर और पर्टियों में काटा जाता है इस रबर मिश्रण को फिर कंडक्टर पर लगाया जाता है और लगभग 150°C तक गर्म किया जाता है इस पूरी प्रक्रिया को वालों को वल्कनाइजेशन कहा जाता है और जो उत्पाद तैयार होता है उसे वल्केनाइज इंडियन रबर कहा जाता है। यह इंसुलेशन 150°C तक तापमान सह सकता है।
वल्केनाइज इंडियन रबर की मैकेनिकल स्ट्रेंथ, टिकाऊपन और प्रतिरोधकता शुद्ध रबर से अधिक होती है। परन्तु इसका सबसे बड़ी समस्या यह है की सल्फर तांबे से तुरंत क्रिया करने लगता है इसलिए जिन केबलो में इस इंसुलेशन का प्रयोग किया जाता है उसमे कंडक्टर को (Tinned copper) टिन्नड तांबा का बनाया जाता है। इस प्रकार का इंसुलेशन सामान्यतः निम्न और मध्यम वोल्टेज केबलो के लिए प्रयुक्त होता है।

3. इम्प्रेग्नेटेड कागज (Impregnated paper): यह यह रासायनिक क्रियाओं वाला कागज होता है जिसको लकड़ी के छिलके या कागज से बनाया जाता है और फिर इसको पैराफिन अथवा नेप्थीनिक जैसे पदार्थ द्वारा भरा जाता है। तेल भरने से इसमें एयर डक्ट (Air duct) समाप्त हो जाता है और ऑक्सीजन न होने से आग लगने का खतरा कम हो जाता है।

इम्प्रेग्नेटेड कागज के लाभ:
1. कम लागत (Low cost)
2. निम्न कैपेसिटेंस (Low capacitance)
3. उच्च डाइलेक्ट्रिक स्ट्रैंथ (High dielectric strength)
4. उच्च इंसुलेशन प्रतिरोध (High insulation resistance)

इम्प्रेग्नेटेड कागज के नुकसान:
1. कागज को यदि इंप्रेग्नेट किया जाए तो भी वह हाइग्रोस्कोपिक ही रहेगा।
2. यह नमी को सोखता है और इस प्रकार केबल की प्रतिरोधकता को कम करता है।
किसी कारण पेपर से इंसुलेट किए हुए केबल पर हमेशा संरक्षण कवच लगाया जाता है और इनको कभी भी बिना सील के नहीं रखा जाता है यदि यह साइट पर बिना प्रयोग के रखा जाता है तो उसके सिरे अस्थाई तौर पर मोम या तार से सोल किए जाते हैं।

4. वार्निश केमब्रीक (Varnished Cambric): यह कॉटन क्लॉथ इम्प्रेग्नेटेड होता है जिसे वार्निश के साथ कोट किया जाता है इस तरह के इंसुलेशन को एंपायर टाइप भी कहते हैं। कैंब्रिक कंडक्टर के ऊपर टेप के साथ में लपेटा जाता है केबल के मुड़ने से एक टर्न दूसरे टर्न पर आसानी से फिसल सके इसलिए इसकी सतह को पेट्रोलियम जेली के मिश्रण के साथ कोट किया जाता है जैसा कि वार्निश कैंब्रिक हाइग्रोस्कोपिक होता है इस तरह केबल मैटेलिक शीट के साथ मिलते हैं जिसकी डाइलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ लगभग 4KV/mm और परमिट्टीविटी 2.5 से 3.8 होती है।

5. पालीविनाइल क्लोराइड (Polyvinyl Chloride or PVC): यह इंसुलेशन पदार्थ सिंथेटिक योगिक होता है यह एसिटिलीन पॉलीमराइजेशन से प्राप्त होता है और यह सफेद पाउडर के रूप में होता है इस पदार्थ को केबल इंसुलेशन के लिए बनाया जाता है यह प्लास्टि साइजर जो द्रव के रूप में उच्च वायलिग पॉइंट का होता है के साथ यौगिक बनाता है प्लास्टि साइजर जेल के रूप में या प्लास्टिक के रूप में आवश्यक तापमान की रेंज में उपलब्ध होता है सबसे ज्यादा इसी प्रकार के इंसुलेशन का प्रयोग किया जाता है।

पीवीसी इंसुलेशन के लाभ:
1. इंसुलेशन उच्च होता है।
2. डाइलेक्ट्रिक स्ट्रैंथ अच्छा होता है।
3. विभिन्न तापक्रम पर मेकेनिकल टफनेस होती है।

FAQ – Underground Cable (UG Cable)


Q1. UG Cable क्या होती है?
UG केबल वह बिजली केबल होती है जिसे जमीन के नीचे बिछाया जाता है ताकि बिजली सप्लाई सुरक्षित और स्थिर बनी रहे।

Q2. Underground Cable ओवरहेड लाइन से बेहतर क्यों होती है?
UG Cable मौसम, तूफान, पेड़ गिरने और बाहरी नुकसान से सुरक्षित रहती है, इसलिए इसमें फॉल्ट और ब्रेकडाउन कम होते हैं।

Q3. UG Cable में कौन सा insulation उपयोग होता है?
UG Cable में सामान्यतः PVC, XLPE या पेपर इंसुलेशन का उपयोग किया जाता है, जो केबल को नमी और करंट लीकेज से बचाता है।

Q4. UG Cable का उपयोग कहाँ किया जाता है?
UG Cable का उपयोग शहरों, कॉलोनियों, इंडस्ट्रियल एरिया, एयरपोर्ट, मेट्रो और अस्पतालों में किया जाता है।

Q5. UG Cable की उम्र कितनी होती है?
सही तरीके से डाली गई UG Cable 20 से 40 साल तक सुरक्षित रूप से काम कर सकती है।

Conclusion – UG Cable (Underground Cable)


UG Cable (Underground Cable) आधुनिक बिजली वितरण प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी मजबूत संरचना, बेहतर insulation और सुरक्षित डिज़ाइन इसे ओवरहेड लाइन की तुलना में अधिक भरोसेमंद बनाते हैं। UG Cable का उपयोग न केवल दुर्घटनाओं को कम करता है बल्कि बिजली सप्लाई को भी ज्यादा स्थिर और लंबे समय तक बनाए रखता है। इसलिए आज के स्मार्ट शहरों और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में Underground Cable सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।

Call To Action (CTA)


अगर आपको UG Cable, Electrical Safety, Wiring और ITI से जुड़े ऐसे ही आसान और भरोसेमंद आर्टिकल पढ़ना अच्छा लगता है, तो
Electric Topic को जरूर विज़िट करें और इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।
इससे आप भी सीखेंगे और दूसरों को भी सही जानकारी मिलेगी।

अन्य महत्वपूर्ण टॉपिक

Post a Comment

3 Comments

Please do not enter any spam link in the comment box. All the comments are Reviewed by Admin.

  1. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  2. Very informative article thx

    ReplyDelete
Post a Comment

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top