Waste in Hindi | अपशिष्ट के प्रकार, स्रोत और प्रबंधन

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अपशिष्ट (Waste) उन सभी पदार्थों को कहा जाता है जो उपयोग के बाद बेकार हो जाते हैं और जिनकी हमें आगे आवश्यकता नहीं रहती। घरों, स्कूलों, उद्योगों, अस्पतालों, खेतों और बाजारों से निकलने वाला कचरा ही अपशिष्ट कहलाता है। इसमें कागज, प्लास्टिक, भोजन के अवशेष, धातु, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और तरल अपशिष्ट जैसे गंदा पानी भी शामिल होते हैं।
आज के समय में जनसंख्या वृद्धि और बढ़ते उपभोग के कारण अपशिष्ट की मात्रा तेजी से बढ़ रही है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ पैदा हो रही हैं। इसलिए अपशिष्ट प्रबंधन बहुत आवश्यक हो गया है, ताकि कचरे का सही तरीके से निपटान, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण किया जा सके।
इस लेख में हम जानेंगे कि अपशिष्ट क्या है, उसके प्रकार, स्रोत और अपशिष्ट प्रबंधन के तरीके क्या हैं।

Problem and solution waste management recycling poster


अपशिष्ट क्या है? (Definition in Hindi)


अपशिष्ट (Waste) वे सभी पदार्थ होते हैं जो उपयोग के बाद बेकार हो जाते हैं और जिन्हें हम फेंक देते हैं, जैसे कचरा, प्लास्टिक, बचा हुआ भोजन, कागज और टूटे-फूटे सामान।

📑 Table of Contents


अपशिष्ट का अर्थ और परिभाषा (Meaning & Definition)


अपशिष्ट का अर्थ होता है — उपयोग के बाद बचा हुआ या अनुपयोगी पदार्थ।
अपशिष्ट की परिभाषा — जो पदार्थ अपने मूल उपयोग के बाद बेकार हो जाता है और जिसे त्याग दिया जाता है, उसे अपशिष्ट (Waste) कहते हैं।

Waste Kya Hota Hai
Disposal of Waste Materials

अपशिष्ट क्या होता है? (What Is Waste)


अवांछित या अनुपयोगी पदार्थ को अपशिष्ट कहते हैं, अपशिष्ट कोई भी चीज हो सकती है जिसका प्रारंभिक उपयोग कर लेने के बाद यह खराब अनुपयोगी और बेकार हो जाता है।
अपशिष्ट सजीवो द्वारा उपयोग किए जाने वाले पदार्थ उद्योगों एवं कृषि कार्य आदि के द्वारा प्राप्त होने वाले उत्पाद होते हैं। प्रायः अपशिष्ट को शहर के बाहरी क्षेत्र में फेंका जाता है। खुले में अपशिष्ट का निदान करने से उपयोगी भूमि, अनुपयोग भूमि में परिवर्तित हो जाती है या कह सकते है की उपयोगी भूमि बंजर बन जाती है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है।
"अपशिष्ट (waste) का शाब्दिक अर्थ आवंछित, अनुपयोगी, वर्ज्य, या कचरा होता है।" किसी भी पदार्थ का प्राथमिक उपयोग करने या होने के बाद जो शेष बचता है, उसे अपशिष्ट या अवांछित पदार्थ कहा जाता है। उदाहरण के लिए नगरपालिका (घरेलु कचरा), जल अपशिष्ट (सिवेज- शारीरिक मल-मूत्र), रेडियोधर्मी अपशिष्ट इत्यादि। वैसे तो कोई भी वस्तु बेकार नहीं होती है उसे सही जगह पर उपयोग करने या सही प्रक्रिया से गुजारने पर वह भी किसी न किसी उपयोग में आ जाती है। अर्थात जो चीज एक जगह कचरा या वर्ज्य है वही वस्तु दूसरी जगह उपयोगी हो सकती है।
अपशिष्ट को निम्न भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है–

1. ग्रामीण अपशिष्ट (Rural waste)
2. शहरी अपशिष्ट (Urban waste)
  • (A) ठोस अपशिष्ट (Solid waste)
  • (B) द्रव अपशिष्ट (Liquid waste)

इन सभी अपशिष्ट पदार्थ के बारे में एक-एक करके विस्तृत जानकारी नीचे दिया गया है–

1. ग्रामीण अपशिष्ट (Rural Waste In Hindi): कृषि और पशुपालन कार्य से प्राप्त अपशिष्ट ग्रामीण अपशिष्ट कहलाता है। उनका पुनः उपयोग कृषि से प्राप्त अपशिष्ट को जलाकर या खाद बनाकर किया जा सकता है। मानव एवं पशुओं के द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट का उपयोग बायोगैस ईंधन के उत्पादन संयंत्र में किया जाता है। पशुओं के गोबर का उपयोग प्रायः खाद के रूप में किया जाता है।

2. शहरी अपशिष्ट (Urban Waste In Hindi): शहरी अपशिष्ट घरेलू वस्तुओ या नगर सीमा में औद्योगिक संस्थानों से प्राप्त अपशिष्ट होता है। शहरी अपशिष्ट को दो भागों में विभाजित किया जाता है–
(A) ठोस अपशिष्ट (Solid Waste In Hindi): ठोस अपशिष्ट में ठोस पदार्थ जैसे कि समाचार पत्र, टूटा हुआ कांच, डिब्बा और बोतल, प्लास्टिक की चीजें एवं पॉलीथिन जैसे पदार्थ आते है।
(B) द्रव अपशिष्ट (liquid waste in hindi): जल पर आधारित अपशिष्ट है जो मुख्य अवशिष्ट संक्रियण स्रोत से प्राप्त होता है।

अपशिष्ट के स्रोत (Sources Of Waste In Hindi)


अपशिष्ट पदार्थ के निम्न स्रोत होते है–
1. औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial waste in hindi): औद्योगिक अपशिष्ट में ठोस और द्रव प्रकार के अपशिष्ट होते है तथा इसमें हानिकारक रसायनिक और धात्विक अपशिष्ट होते है।
2. घरेलू अपशिष्ट (Domestic waste in hindi): घरेलू अपशिष्ट में सभी प्रकार का कचरा, धूल और मल आदि अपशिष्ट आता हैं। इसमें कुछ जलने और कुछ न जलने वाले पदार्थ भी होते है जब इस अपशिष्ट का खुले में निदान किया जाता है तो इसका बहुत हानिकारक प्रभाव होता है। 
3. कृषि अपशिष्ट (Agricultural waste): कृषि अपशिष्ट में घरेलू पशुओं द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट आता है। इस अपशिष्ट का खुले में निदान करने से मनुष्य और पशुओं में स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याएं होती है। 
4. पावर प्लांट अपशिष्ट (Power plant waste in hindi): पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश भी अपशिष्ट के अंतर्गत आता है। यह मानव जीवन के लिए बहुत ही हानिकारक होता है तथा यह आस–पास की भूमि को भी बंजर बना देता है।
5. चिकित्सालय अपशिष्ट (Hospital waste in hindi): चिकित्सालय अपशिष्ट सबसे ज्यादा हानिकारक होता है जिसमे सूक्ष्म जीव होते है जो संक्रामक और असंक्रामक रोगों का कारण बनते है इसलिए इनका निदान करना बहुत जरूरी होता है।

अपशिष्ट प्रबंधन के तरीके (Methods of Waste Management) 


अपशिष्ट प्रबंधन की विधियां निम्नलिखित है–
निदान प्रक्रिया (disposal process in hindi): यह अपशिष्ट प्रबंधन का अंतिम चरण है इस निदान बिंदु या स्थल पर पदार्थों को निम्न क्रियाओं के लिए चुना जाता है–
  • पुनर्चक्रण
  • खाद बनाना
  • जमीन के गर्त को भरना
  • दहन
  • अपशिष्ट मिश्रण
  • पुनः उपयोगी बनाना
  • पशुओ के भोजन के रूप में
  • जलाने योग्य लकड़ी
Method of Waste Disposal In Hindi
Method of Waste Disposal

1. पुनर्चक्रण (Recycling): पुनर्चक्रण अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रचलित और सस्ती विधि है। इस विधि को किसी भी व्यक्ति के द्वारा बहुत ही आसानी से किया जा सकता है। इस विधि से ऊर्जा की बचत होती है और प्रदूषण भी उत्पन्न नहीं होता है।

2. खाद बनाना (Composing): यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो हानिकारक उत्पादों से पूर्णतः मुक्त होता है इस प्रक्रिया में पदार्थ उसके कार्बनिक अवयवों में विभक्त होकर खाद के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

3. जमीन के गर्त को भरना (Landfill): जिस अपशिष्ट का पुनः उपयोग या पुनर्चक्रण नहीं किया जा सकता है उन्हें शहर के निचले क्षेत्र में पतली पर्त के रूप में बिछाया जाता है अपशिष्ट के प्रत्येक पर्त के ऊपर मिट्टी की एक पर्त बिछाई जाती है एक बार जब यह प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है तो इस क्षेत्र को गृह निर्माण के अनुपयोगी घोषित कर दिया जाता है और इसे क्षेत्र को पार्क या खेल के मैदान के रूप में प्रयोग किया जाता है।

4. दहन (Incineration): यह कूड़ा कचरा को जलाने की प्रक्रिया है जिससे यह अदहनशील राख, धुआं और ऊष्मा के रूप में परिवर्तित हो जाता है यह ऊष्मा आदि को पर्यावरण में मुक्ता करता है तथा अपशिष्ट का आयतन 90% कम कर देता है कभी-कभी इसका उपयोग विद्युत पावर उत्पन्न करने में भी किया जाता है।

5. अपशिष्ट मिश्रण (Waste composion): इस विधि में अपशिष्ट पदार्थ जैसे डिब्बा, प्लास्टिक की बोतल आदि को गला कर पुनः उपयोगी बनाया जाता है इस प्रक्रिया में स्थान की अधिक आवश्यकता होती है अतः इसे बनाना, परिवहन और रख रखाव में समस्या आती है।

6. पुनः उपयोगी बनाना (Resuse): इस विधि के द्वारा अपशिष्ट पदार्थ की मात्रा को सही तरीके से अपनाकर कम किया जा सकता है। जैसे– यदि कोई वस्तु पुनः उपयोग के लायक है तो उस पदार्थ को फेंकने से पहले उसे साफ करके उसे दोबारा उपयोग करने के बारे में सोचना चाहिए, आइसक्रीम और मक्खन की छोटे प्लास्टिक के टब का उपयोग नट, वोल्ट, इलेक्ट्रिशियन और इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान को रखने के लिए किया जा सकता है।

7. पशुओ के भोजन के रूप में (Animal feed): सब्जियों का छिल्का और जूठा भोजन का उपयोग जानवरों के भोजन के लिए किया जा सकता है। जैसे– मांस के टुकड़े और हड्डियों का उपयोग कुत्तों को खिलाने के लिए किया जा सकता हैं।

8. ज्वलनशील लकड़ी (Fire wood): लकड़ी के बहुत कम भाग का निदान पुनः उपयोग के लिए उपयोग किया जाता है। लकड़ी के फर्नीचर आदि बनाया जाता है फर्नीचर बनाने से पहले लकड़ी को कई टुकड़ों में काटा जाता है इस प्रक्रिया के दौरान छोटे टुकड़े का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है।

अपशिष्ट से होने वाली समस्याएँ (Problems Caused by Waste)


जब अपशिष्ट का सही तरीके से निपटान नहीं किया जाता, तो यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन जाता है। खुले में फेंका गया कचरा, नालियों में जमा अपशिष्ट और जलाया गया कूड़ा हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित करता है। इससे कई तरह की बीमारियाँ फैलती हैं और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुँचता है।

1. पर्यावरण प्रदूषण
अपशिष्ट को खुले में फेंकने या जलाने से हवा, पानी और भूमि तीनों प्रदूषित होते हैं। इससे पेड़-पौधों, जानवरों और मनुष्यों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

2. जल प्रदूषण
कचरा और गंदा पानी नदियों, तालाबों और भूजल में मिल जाता है, जिससे पीने का पानी दूषित हो जाता है। यह जलजनित रोगों का कारण बनता है।

3. वायु प्रदूषण
जब कूड़ा जलाया जाता है, तो उससे जहरीली गैसें निकलती हैं जो हवा को प्रदूषित करती हैं। इससे सांस से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ती हैं।

4. बीमारियाँ
कचरे में मच्छर, मक्खी और कीट पनपते हैं, जो मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड जैसी बीमारियाँ फैलाते हैं।

5. भूमि खराब होना
अधिक मात्रा में कचरा जमीन पर जमा होने से मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है, जिससे खेती और पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।

अपशिष्ट कम करने के उपाय (How to Reduce Waste)


अपशिष्ट को कम करने के लिए हमें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ सरल आदतें अपनानी चाहिए। जैसे कि प्लास्टिक का कम उपयोग करना चाहिए, कपड़े या जूट के थैले का इस्तेमाल करना चाहिए और एक बार उपयोग होने वाली चीज़ों से बचना चाहिए। गीले कचरे को अलग और सूखे कचरे को अलग रखना चाहिए तथा जैविक कचरे से खाद (कंपोस्ट) बनाना चाहिए। उपयोग योग्य वस्तुओं को दोबारा इस्तेमाल करना चाहिए और पुराने सामान को रीसाइकिल करना चाहिए। इन उपायों से अपशिष्ट कम किया जा सकता है और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है।

अपशिष्ट प्रबंधन के लाभ (Benefits of Waste Management)


अपशिष्ट प्रबंधन से पर्यावरण साफ और सुरक्षित रहता है। इससे हवा, पानी और भूमि प्रदूषण कम होता है तथा बीमारियाँ फैलने से रुकती हैं। कचरे का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण करने से प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है और ऊर्जा की भी कमी नहीं होती। साथ ही, शहर स्वच्छ बनते हैं और जीवन स्तर बेहतर होता है।

FAQ – अपशिष्ट से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


Q1. अपशिष्ट क्या होता है?
अपशिष्ट वह पदार्थ होता है जो उपयोग के बाद बेकार हो जाता है और जिसे फेंक दिया जाता है, जैसे कचरा, प्लास्टिक, भोजन का अवशेष आदि।

Q2. अपशिष्ट कितने प्रकार के होते हैं?
अपशिष्ट मुख्य रूप से ठोस, तरल, गैसीय, जैविक और अजैविक प्रकार के होते हैं।

Q3. अपशिष्ट के मुख्य स्रोत क्या हैं?
घर, उद्योग, अस्पताल, खेत, बाजार और निर्माण स्थल अपशिष्ट के प्रमुख स्रोत हैं।

Q4. अपशिष्ट प्रबंधन क्यों जरूरी है?
अपशिष्ट प्रबंधन से प्रदूषण कम होता है, बीमारियाँ रुकती हैं और पर्यावरण सुरक्षित रहता है।

Q5. अपशिष्ट कम करने के आसान तरीके क्या हैं?
प्लास्टिक का कम उपयोग, पुनः उपयोग, रीसाइक्लिंग और गीले-सूखे कचरे को अलग करना अपशिष्ट कम करने के आसान तरीके हैं।

Q6. अपशिष्ट से कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं?
इससे जल, वायु और भूमि प्रदूषण होता है तथा कई बीमारियाँ फैलती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)


अपशिष्ट हमारे जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन यदि इसका सही तरीके से प्रबंधन न किया जाए तो यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अपशिष्ट को कम करना, उसका पुनः उपयोग करना और पुनर्चक्रण करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि हम सभी अपनी जिम्मेदारी समझें और स्वच्छता अपनाएँ, तो एक स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण बनाया जा सकता है।

CTA (Call to Action)


अगर आपको अपशिष्ट और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर साझा करें। स्वच्छ पर्यावरण के लिए आज ही कचरा अलग-अलग करना शुरू करें और रीसाइक्लिंग को अपनाएँ।
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