यह एक Exothermic Reaction है, क्योंकि इसमें ऊर्जा बाहर निकलती है।
Fuel + Oxygen + Heat का रिएक्शन
दहन होने के लिए तीन चीज़ें आवश्यक होती हैं:
1. ईंधन (Fuel) – जैसे पेट्रोल, डीज़ल, लकड़ी, LPG, कोयला आदि।
2. ऑक्सीजन (Oxygen) – जो हवा में मौजूद होती है।
3. उष्मा (Heat) – जो दहन शुरू करने के लिए आवश्यक ताप प्रदान करती है।
इसे अक्सर अग्नि त्रिकोण (Fire Triangle) भी कहा जाता है।
ऊर्जा (Heat & Light) का उत्पादन: जब ईंधन जलता है तो उसमें संग्रहीत रासायनिक ऊर्जा, ऊष्मा ऊर्जा (Heat Energy) और प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) में परिवर्तित हो जाती है।
उदाहरण:
• खाना पकाने में गैस से निकलने वाली गर्मी।
• इंजन में पेट्रोल के जलने से वाहन की गति।
उदाहरण:
• गैस चूल्हा (LPG Stove) – LPG गैस ऑक्सीजन के साथ जलकर गर्मी पैदा करती है।
• वाहन का इंजन (Engine) – पेट्रोल/डीज़ल जलने से पावर उत्पन्न होती है।
• मोमबत्ती (Candle) – मोम ऑक्सीजन के साथ जलकर प्रकाश और गर्मी देता है।
• लकड़ी का जलना – लकड़ी ऑक्सीजन के साथ जलकर आग उत्पन्न करती है।
दहन की परिभाषा (Definition of Combustion)
दहन (Combustion) एक तीव्र रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ (ईंधन) ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऊष्मा (Heat) तथा प्रायः प्रकाश (Light) उत्पन्न करता है। इसे सामान्य रूप से ऐसे लिखा जा सकता है:
Fuel + O₂ → Oxides + Heat + Light
Oxidation reaction
Oxidation Reaction वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन (O₂) के साथ जुड़ता है या इलेक्ट्रॉन खोता है।
सरल शब्दों में:
जब कोई पदार्थ ऑक्सीजन ग्रहण करता है, तो वह ऑक्सीकरण कहलाता है।
उदाहरण:
• कार्बन + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड।
• लोहे पर जंग लगना (धीमी ऑक्सीकरण प्रक्रिया)।
• दहन (Combustion) भी एक प्रकार की तीव्र ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
Oxidation वह प्रक्रिया है जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ संयोजित होता है।
• दहन के दौरान ईंधन ऑक्सीजन ग्रहण करता है और उसके ऑक्साइड (Oxides) बनते हैं।
उदाहरण:
• कार्बन + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड
• मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड
इसलिए हर दहन एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है, लेकिन हर ऑक्सीकरण दहन नहीं होता (क्योंकि कुछ ऑक्सीकरण धीमी गति से होते हैं जैसे जंग लगना)।
Exothermic reaction
Exothermic Reaction वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें ऊर्जा (मुख्यतः ऊष्मा) बाहर निकलती है।
सरल शब्दों में:
जिस अभिक्रिया में गर्मी उत्पन्न होती है, उसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण:
• LPG गैस का जलना।
• पेट्रोल/डीजल का इंजन में जलना।
• मोमबत्ती का जलना।
दहन हमेशा एक Exothermic Reaction होता है क्योंकि इसमें ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होते हैं।
📑 Table of Contents
दहन की आवश्यक शर्तें (Essential Conditions for Combustion)
Fuel (ईंधन)किसी भी पदार्थ के जलने (Combustion) के लिए केवल ईंधन होना ही पर्याप्त नहीं है। दहन होने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें (Essential Conditions) पूरी होना जरूरी है।
यदि इन शर्तों में से कोई एक भी अनुपस्थित हो जाए, तो आग नहीं लगेगी या बुझ जाएगी।
इन्हीं आवश्यक तत्वों को समझाने के लिए अग्नि त्रिकोण सिद्धांत (Fire Triangle Concept)) दिया गया है।
अग्नि त्रिकोण सिद्धांत (Fire Triangle Concept)
Fire Triangle के अनुसार दहन के लिए तीन चीजें अनिवार्य हैं:
1. ईंधन (Fuel)
2. ऑक्सीजन (Oxygen)
3. उष्मा / प्रज्वलन ताप (Heat / Ignition Temperature)
अगर इनमें से किसी एक को हटा दिया जाए, तो आग बुझ जाती है।
ईंधन (Fuel): Fuel वह पदार्थ है जो ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करता है।
यह ठोस (लकड़ी, कोयला), द्रव (पेट्रोल, डीज़ल) या गैस (LPG, CNG) के रूप में हो सकता है। बिना ईंधन के दहन संभव नहीं है।
ऑक्सीजन (Oxygen): ऑक्सीजन दहन को होने और जारी रखने में सहायता करती है। हवा में लगभग 21% ऑक्सीजन पाई जाती है, जो सामान्य दहन के लिए पर्याप्त होती है। यदि ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक दी जाए, तो आग स्वतः बुझ जाती है।
प्रज्वलन ताप (Ignition Temperature): Ignition Temperature वह न्यूनतम तापमान है जिस पर कोई पदार्थ जलना शुरू करता है। हर पदार्थ का प्रज्वलन ताप अलग-अलग होता है। जब तक पदार्थ इस ताप तक नहीं पहुँचता, तब तक वह दहन प्रारंभ नहीं करेगा।
दहन के प्रकार (Types of Combustion)
दहन (Combustion) अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग प्रकार से होता है। गति, ऑक्सीजन की उपलब्धता, तापमान और रासायनिक प्रक्रिया के आधार पर दहन को कई प्रकारों में विभाजित किया जाता है।
तीव्र दहन (Rapid Combustion): तीव्र दहन वह दहन है जो बहुत तेजी से होता है और तुरंत ऊष्मा व प्रकाश उत्पन्न करता है। इसमें बाहरी स्रोत (जैसे माचिस या चिंगारी) से आग लगाई जाती है।
उदाहरण:
• LPG गैस का जलना।
• पेट्रोल का इंजन में जलना।
मंद दहन (Slow Combustion): मंद दहन वह दहन है जो बहुत धीमी गति से होता है और सामान्यतः प्रकाश उत्पन्न नहीं करता। इसमें ऊष्मा धीरे-धीरे निकलती है।
उदाहरण:
• लोहे पर जंग लगना।
• हमारे शरीर में भोजन का ऑक्सीकरण (Respiration)।
स्वतः दहन (Spontaneous Combustion): स्वतः दहन वह दहन है जो बिना किसी बाहरी आग या चिंगारी के स्वयं ही प्रारंभ हो जाता है। यह तब होता है जब पदार्थ का तापमान स्वयं उसके प्रज्वलन ताप तक पहुँच जाता है।
उदाहरण:
• कोयले का ढेर।
• सूखी घास (Hay) का अचानक जल उठना।
विस्फोटक दहन (Explosion): विस्फोटक दहन एक अत्यंत तीव्र दहन है जो अचानक बहुत अधिक गैस, ऊष्मा और दबाव उत्पन्न करता है। यह बहुत कम समय में होता है और तेज आवाज के साथ होता है।
उदाहरण:
• पटाखों का फटना।
• गैस सिलेंडर का विस्फोट।
पूर्ण दहन (Complete Combustion): पूर्ण दहन तब होता है जब ईंधन पर्याप्त ऑक्सीजन में पूरी तरह जलता है। इसमें कम धुआँ निकलता है और नीली लौ (Blue Flame) बनती है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और जलवाष्प (H₂O) बनता है।
उदाहरण:
• गैस चूल्हे की नीली लौ।
अपूर्ण दहन (Incomplete Combustion): अपूर्ण दहन तब होता है जब ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है।
इसमें पीली लौ (Yellow Flame) और धुआँ उत्पन्न होता है। इस प्रक्रिया में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
कालिख (Soot) बनता है। कार्बन मोनोऑक्साइड एक जहरीली गैस है।
उदाहरण:
• बंद कमरे में कोयले का जलना।
• पीली, धुआँदार लौ।
दहन प्रक्रिया के चरण Combustion Process Steps)
दहन (Combustion) एक अचानक होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कई चरणों में पूरी होती है। जब किसी ईंधन को जलाया जाता है, तो वह धीरे-धीरे गर्म होता है, वाष्प बनाता है और फिर ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऊर्जा उत्पन्न करता है।
इन चरणों को समझना दहन की वैज्ञानिक प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।
ईंधन का गर्म होना (Heating of Fuel): दहन की शुरुआत में ईंधन को बाहरी स्रोत (माचिस, चिंगारी, गर्म सतह आदि) से गर्म किया जाता है। यह तापमान धीरे-धीरे बढ़कर ईंधन को उसके प्रज्वलन ताप (Ignition Temperature) तक पहुँचा देता है। जब तक ईंधन पर्याप्त गर्म नहीं होता, दहन प्रारंभ नहीं होता।
वाष्प का निर्माण (Formation of Vapour): जब ईंधन गर्म होता है, तो वह गैसीय अवस्था (Vapour) में बदलने लगता है। अधिकांश ईंधन पहले वाष्प बनाते हैं और फिर वही वाष्प जलती है।
उदाहरण: मोमबत्ती में मोम पहले पिघलता है, फिर वाष्प बनकर जलता है।
ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया (Reaction with Oxygen): ईंधन की वाष्प हवा में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करती है। यह एक तीव्र ऑक्सीकरण (Oxidation) अभिक्रिया होती है। यही चरण वास्तविक दहन की मुख्य रासायनिक प्रक्रिया है।
ऊष्मा और लौ का उत्पन्न होना (Release of Heat & Flame): अभिक्रिया के दौरान बड़ी मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होते हैं। इसी कारण हमें लौ (Flame) दिखाई देती है। उत्पन्न हुई ऊष्मा आगे और ईंधन को गर्म करती है, जिससे दहन जारी रहता है।
अवशेष का निर्माण (Residue Formation): दहन के बाद कुछ पदार्थ गैस (जैसे CO₂, H₂O) के रूप में निकल जाते हैं। ठोस ईंधन के जलने पर राख (Ash) या अन्य अवशेष बच सकते हैं। यह अवशेष दहन की अंतिम अवस्था को दर्शाता है।
इस प्रकार दहन प्रक्रिया पाँच मुख्य चरणों में पूरी होती है — गर्म होना, वाष्प बनना, ऑक्सीजन से अभिक्रिया, ऊर्जा उत्पन्न होना और अंत में अवशेष बनना।
दहन के उत्पाद (Products of Combustion)
जब कोई ईंधन ऑक्सीजन के साथ जलता है, तो दहन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार के पदार्थ और ऊर्जा उत्पन्न होती है। ये उत्पाद दहन की पूर्णता (Complete) या अपूर्णता (Incomplete) पर निर्भर करते हैं।
नीचे दहन के प्रमुख उत्पादों को संक्षेप में बताया गया है।
Carbon Dioxide (CO₂): पूर्ण दहन के दौरान बनने वाली गैस कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) कहलाती है।
Carbon Monoxide (CO): अपूर्ण दहन में ऑक्सीजन की कमी के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी विषैली गैस बनती है।
Water Vapour: हाइड्रोजन युक्त ईंधन के जलने पर जलवाष्प (H₂O) उत्पन्न होती है।
Smoke & Soot: अपूर्ण दहन के कारण धुआँ और कालिख (Soot) बनते हैं।
Energy: दहन के दौरान ऊष्मा और प्रकाश के रूप में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
ज्वाला की संरचना (Flame Structure)
जब कोई ईंधन जलता है तो हमें ज्वाला (Flame) दिखाई देती है। ज्वाला एक समान नहीं होती, बल्कि इसमें अलग-अलग तापमान और दहन की अवस्था के अनुसार विभिन्न भाग (Zones) होते हैं।
सामान्यतः ज्वाला को तीन मुख्य भागों में बाँटा जाता है — Inner Zone, Middle Zone और Outer Zone।
आंतरिक भाग – अपूर्ण दहन (Inner Zone): यह ज्वाला का सबसे अंदरूनी भाग होता है। यहाँ ईंधन की वाष्प मौजूद रहती है लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण अपूर्ण दहन होता है। इस भाग का तापमान कम होता है और यह अपेक्षाकृत गहरा (डार्क) दिखाई देता है।
मध्य भाग – आंशिक दहन (Middle Zone): यह ज्वाला का बीच वाला भाग होता है। यहाँ आंशिक दहन होता है और पीले रंग की चमकीली लौ दिखाई देती है।
इस क्षेत्र का तापमान आंतरिक भाग से अधिक होता है।
बाहरी भाग – पूर्ण दहन (Outer Zone): यह ज्वाला का सबसे बाहरी और सबसे गरम भाग होता है। यहाँ ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा होने से पूर्ण दहन होता है। इस भाग में नीली लौ दिखाई देती है और तापमान सबसे अधिक होता है।
ऊष्मीय मान (Calorific Value of Fuel)
ऊष्मीय मान किसी ईंधन के 1 किलोग्राम के पूर्ण दहन पर उत्पन्न होने वाली कुल ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा को कहते हैं।
अर्थात, यह बताता है कि कोई ईंधन कितनी ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
इकाई (Unit): ऊष्मीय मान की SI इकाई kJ/kg (किलो जूल प्रति किलोग्राम) होती है। इसका अर्थ है — 1 किलोग्राम ईंधन के जलने पर उत्पन्न ऊर्जा (किलो जूल में)।
उच्च ऊष्मीय मान वाले ईंधन (High Calorific Fuels): वे ईंधन जिनका ऊष्मीय मान अधिक होता है और जो अधिक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।
उदाहरण: LPG, CNG, पेट्रोल, डीज़ल।
निम्न ऊष्मीय मान वाले ईंधन (Low Calorific Fuels): वे ईंधन जिनका ऊष्मीय मान कम होता है और जो अपेक्षाकृत कम ऊर्जा देते हैं।
उदाहरण: लकड़ी, कोयला (साधारण), गोबर के उपले।
दहन को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Combustion)
दहन एक रासायनिक प्रक्रिया है जो कई बाहरी और आंतरिक कारकों पर निर्भर करती है। यदि इन कारकों में परिवर्तन हो जाए, तो दहन की गति, तीव्रता और पूर्णता (Complete/Incomplete) प्रभावित होती है। नीचे दहन को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों को सरल भाषा में समझाया गया है।
तापमान (Temperature): दहन शुरू होने के लिए पदार्थ को उसके प्रज्वलन ताप (Ignition Temperature) तक पहुँचना आवश्यक है। तापमान जितना अधिक होगा, दहन उतनी तेजी से होगा। कम तापमान पर दहन रुक सकता है।
उदाहरण: गीली लकड़ी जल्दी नहीं जलती क्योंकि उसका तापमान जल्दी नहीं बढ़ता।
सतह क्षेत्रफल (Surface Area): ईंधन का सतह क्षेत्रफल जितना अधिक होगा, दहन उतनी तेजी से होगा।
बारीक चूरा (Powder) जल्दी जलता है। मोटी लकड़ी धीरे जलती है।
कारण: अधिक सतह क्षेत्रफल → अधिक ऑक्सीजन संपर्क → तेज दहन।
ऑक्सीजन की आपूर्ति (Oxygen Supply): ऑक्सीजन दहन के लिए आवश्यक है।
• पर्याप्त ऑक्सीजन → Complete Combustion (नीली लौ, कम धुआँ)
• कम ऑक्सीजन → Incomplete Combustion (पीली लौ, अधिक धुआँ, CO गैस)
उदाहरण: गैस चूल्हे में हवा का छेद बंद कर दें तो पीली लौ बनने लगती है।
ईंधन की प्रकृति (Nature of Fuel): हर ईंधन की रासायनिक संरचना अलग होती है। ज्वलनशील पदार्थ जल्दी जलते हैं। अधिक कार्बन वाले ईंधन अधिक धुआँ उत्पन्न करते हैं। गैसीय ईंधन (LPG, CNG) साफ दहन करते हैं। ईंधन की गुणवत्ता दहन की दक्षता (Efficiency) को प्रभावित करती है।
दाब (Pressure): दाब में परिवर्तन से दहन की दर प्रभावित होती है।
अधिक दाब → गैसों के कण पास आते हैं → अभिक्रिया तेज होती है। IC Engine में उच्च दाब पर दहन अधिक प्रभावी होता है।
उदाहरण: डीज़ल इंजन में उच्च दाब से ईंधन का स्वतः दहन होता है।
दहन के उपयोग (Applications of Combustion)
दहन केवल ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन और औद्योगिक विकास का आधार है। वाहनों से लेकर बिजली उत्पादन और उद्योगों तक, दहन का व्यापक उपयोग होता है। नीचे इसके मुख्य अनुप्रयोग (Applications) को संक्षेप में समझाया गया है।
आंतरिक दहन इंजन (IC Engine): IC Engine में ईंधन (पेट्रोल/डीजल) का दहन सिलेंडर के अंदर होता है।
दहन से उत्पन्न ऊष्मा ऊर्जा पिस्टन को चलाती है, जिससे यांत्रिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
उपयोग: मोटरसाइकिल, कार, ट्रैक्टर और जनरेटर इत्यादि में।
ताप विद्युत संयंत्र (Thermal Power Plant): Thermal power plant में कोयले का दहन करके पानी को भाप में बदला जाता है। यह भाप टरबाइन को घुमाती है और जनरेटर बिजली पैदा करता है।
रसोई गैस (Cooking Gas): घर में उपयोग होने वाली LPG (Liquefied Petroleum Gas) के दहन से नीली लौ उत्पन्न होती है। यह पूर्ण दहन (Complete Combustion) का संकेत है।
उपयोग: खाना पकाने और पानी गर्म करने में।
औद्योगिक भट्टियाँ (Industrial Furnaces): उद्योगों में धातुओं को पिघलाने और गर्म करने के लिए दहन का उपयोग किया जाता है।
उपयोग: स्टील निर्माण, कांच उद्योग और सीमेंट उद्योग में।
वेल्डिंग एवं कटिंग (Welding & Cutting): वेल्डिंग और कटिंग में गैसों (जैसे ऑक्सी-एसीटिलीन) के दहन से उच्च तापमान प्राप्त किया जाता है।
लाभ: धातु जोड़ना, मोटी शीट काटना और निर्माण कार्य में।
दहन के हानिकारक प्रभाव (Harmful Effects of Combustion)
दहन जहाँ एक ओर ऊर्जा प्राप्त करने का मुख्य साधन है, वहीं दूसरी ओर इसके कई गंभीर दुष्प्रभाव भी हैं। ईंधन के जलने से विभिन्न हानिकारक गैसें और कण (particles) वायुमंडल में फैलते हैं, जो मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और पृथ्वी की जलवायु पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। नीचे दहन के प्रमुख हानिकारक प्रभावों को संक्षेप में समझाया गया है।
वायु प्रदूषण (Air pollution): दहन से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) और धुआँ उत्पन्न होता है। ये गैसें वायु को प्रदूषित करती हैं, जिससे: सांस की बीमारियाँ, दमा (Asthma), आँखों में जलन और फेफड़ों की समस्या जैसी बीमारियां होती है।
कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता (CO Poisoning): अपूर्ण दहन (Incomplete Combustion) से Carbon Monoxide (CO) गैस बनती है। CO एक रंगहीन, गंधहीन और अत्यंत जहरीली गैस है। इसके प्रभाव से सिरदर्द, चक्कर, बेहोशी और अधिक मात्रा में होने से मृत्यु भी हो सकती है।
वैश्विक ऊष्मीकरण (Global Warming): दहन से उत्पन्न CO₂ एक ग्रीनहाउस गैस है। यह पृथ्वी की ऊष्मा को वायुमंडल में रोककर तापमान बढ़ाती है। जिसके परिणाम स्वरूप ग्लेशियर पिघलना, समुद्र स्तर बढ़ना और मौसम में असामान्य परिवर्तन जैसी घटनाएं घटित होती हैं।
अम्ल वर्षा (Acid Rain): कोयला और पेट्रोलियम के जलने से SO₂ और NOₓ गैसें निकलती हैं। ये गैसें वर्षा के पानी के साथ मिलकर अम्ल (Acid) बनाती हैं। जिसके परिणाम स्वरूप फसलों को नुकसान, इमारतों का क्षरण, मिट्टी की उर्वरता कम होना और जल स्रोतों का प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है।
सुरक्षा उपाय (Safety Measures)
दहन ऊर्जा प्राप्त करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन यदि इसे नियंत्रित न किया जाए तो यह आग और दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। इसलिए दहन से संबंधित कार्य करते समय उचित सुरक्षा उपाय (Safety Measures) अपनाना अत्यंत आवश्यक है। नीचे प्रमुख सुरक्षा उपायों को संक्षेप में समझाया गया है।
अग्निशामक यंत्र के प्रकार (Fire Extinguisher Types): आग के प्रकार के अनुसार अलग-अलग अग्निशामक यंत्र प्रयोग किए जाते हैं जैसे:
• Water Extinguisher – ठोस पदार्थों (लकड़ी, कागज) की आग के लिए।
• Foam Extinguisher – पेट्रोल, डीज़ल जैसी द्रव आग के लिए।
• CO₂ Extinguisher – विद्युत आग के लिए।
• Dry Chemical Powder (DCP) – बहुउद्देशीय उपयोग के लिए।
हवादारी (Ventilation): जहाँ दहन की प्रक्रिया हो रही हो, वहाँ उचित वेंटिलेशन (हवादारी) होना आवश्यक है। अच्छी हवा के प्रवाह से हानिकारक गैसें बाहर निकल जाती हैं और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनी रहती है। बंद कमरे में दहन करना खतरनाक हो सकता है।
गैस रिसाव की रोकथाम (Gas Leakage Prevention): गैस पाइप और रेगुलेटर की नियमित जाँच करें। रिसाव की जाँच के लिए साबुन के घोल का प्रयोग करें (माचिस का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए)।
गैस की गंध आने पर तुरंत सिलेंडर बंद करें और खिड़कियाँ खोल दें। गैस रिसाव को नजरअंदाज करना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।
आग नियंत्रण के तरीके (Fire Control Methods): आग को नियंत्रित करने के लिए Fire Triangle के किसी एक तत्व को हटाया जाता है:
• शीतलन (Cooling) – पानी डालकर ताप कम करना।
• ढकना (Smothering) – ऑक्सीजन की आपूर्ति रोकना (रेत/कंबल)।
• ईंधन हटाना (Starvation) – ज्वलनशील पदार्थ दूर करना।
इन तरीकों से आग को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
Advantages & Disadvantages
दहन (Combustion) आधुनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसके माध्यम से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। लेकिन इसके साथ कुछ नकारात्मक प्रभाव भी जुड़े हुए हैं। इसलिए दहन के लाभ (Advantages) और हानियाँ (Disadvantages) दोनों को समझना आवश्यक है।
लाभ (Advantages)
ऊर्जा उत्पादन (Energy Production): दहन के माध्यम से बिजली उत्पादन, खाना पकाने और गर्मी प्राप्त करने जैसे कार्य किए जाते हैं। थर्मल पावर प्लांट में ईंधन जलाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।
परिवहन (Transportation): वाहनों में पेट्रोल, डीज़ल और CNG के दहन से इंजन को शक्ति मिलती है। इससे कार, बस, ट्रेन और अन्य परिवहन साधन चलते हैं।
औद्योगिक उपयोग (Industrial Use): उद्योगों में भट्टियों (Furnace), बॉयलर और मशीनों को चलाने के लिए दहन का उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादन प्रक्रिया संभव होती है।
हानियाँ (Disadvantages)
प्रदूषण (Pollution): दहन से CO₂, CO, SO₂ जैसी गैसें निकलती हैं जो वायु प्रदूषण बढ़ाती हैं। यह पर्यावरण के लिए हानिकारक है।
स्वास्थ्य संबंधी खतरे (Health Hazards): अपूर्ण दहन से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी गैसें विषैली होती हैं। इनसे साँस संबंधी रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
पर्यावरणीय क्षति (Environmental Damage): अत्यधिक दहन से ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वनों की कटाई और जीव-जंतुओं पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
दहन मानव जीवन के लिए उपयोगी है, लेकिन इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए स्वच्छ ईंधन और आधुनिक तकनीक का उपयोग आवश्यक है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दहन एक महत्वपूर्ण रासायनिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा हमें ऊष्मा और प्रकाश के रूप में ऊर्जा प्राप्त होती है। यह प्रक्रिया ईंधन, ऑक्सीजन और प्रज्वलन ताप की उपस्थिति में होती है तथा परिस्थितियों के अनुसार इसके विभिन्न प्रकार — जैसे तीव्र दहन, मंद दहन, स्वतः दहन, विस्फोटक दहन, पूर्ण और अपूर्ण दहन — देखे जाते हैं।
पूर्ण दहन ऊर्जा की दृष्टि से अधिक उपयोगी और सुरक्षित होता है, जबकि अपूर्ण दहन हानिकारक गैसें (जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड) उत्पन्न कर सकता है। इसलिए दहन की सही समझ न केवल परीक्षा की दृष्टि से बल्कि दैनिक जीवन और सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
इस प्रकार, दहन विज्ञान (Combustion Science) ऊर्जा उत्पादन और अग्नि सुरक्षा दोनों के लिए एक आधारभूत और महत्वपूर्ण विषय है।
FAQ — दहन (Combustion) क्या है
प्रश्न 01: दहन (Combustion) क्या होता है?
दहन एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई ईंधन ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके ऊष्मा (Heat) और प्रकाश (Light) उत्पन्न करता है। यह एक Exothermic Reaction है क्योंकि इसमें ऊर्जा बाहर निकलती है।
उदाहरण: गैस चूल्हे का जलना, पेट्रोल का इंजन में जलना।
प्रश्न 02: प्रज्वलन ताप (Ignition Temperature) क्या होता है?
प्रज्वलन ताप वह न्यूनतम तापमान है जिस पर कोई पदार्थ जलना शुरू करता है। जब तक पदार्थ इस तापमान तक नहीं पहुँचता, तब तक दहन प्रारंभ नहीं होता। हर पदार्थ का प्रज्वलन ताप अलग-अलग होता है।
प्रश्न 03: लौ (Flame) का सबसे गर्म हिस्सा कौन सा होता है?
लौ का सबसे गरम हिस्सा बाहरी भाग (Outer Zone) होता है। यहाँ Complete Combustion होता है और तापमान सबसे अधिक होता है। गैस चूल्हे की नीली लौ का ऊपरी बाहरी भाग सबसे ज्यादा गरम होता है।
प्रश्न 04. दहन (Combustion) के लिए सबसे जरूरी गैस कौन सी है?
दहन के लिए सबसे जरूरी गैस oxygen (O₂) है।
प्रश्न 05. अग्नि त्रिकोण (Fire Triangle) क्या होता है?
अग्नि त्रिकोण दहन के तीन आवश्यक तत्वों को दर्शाता है —
1. ईंधन (Fuel)
2. ऑक्सीजन (Oxygen)
3. उष्मा / प्रज्वलन ताप (Heat / Ignition Temperature)
यदि इन तीनों में से किसी एक को हटा दिया जाए, तो आग बुझ जाती है।
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