Light Emitting Diode (LED) क्या है? संरचना, कार्य व उपयोग।

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आज के आधुनिक युग में ऊर्जा की बचत और बेहतर रोशनी दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण हो चुके हैं। ऐसे में LED (Light Emitting Diode) तकनीक ने प्रकाश व्यवस्था और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव किया है। LED एक ऐसा सेमीकंडक्टर डिवाइस है जो बहुत कम बिजली में अधिक रोशनी उत्पन्न करता है और पारंपरिक बल्बों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक चलता है।

LED light emitting diode diagram showing LED symbol, colored LEDs and seven segment display for electronics learning


आज LED का उपयोग घरों की लाइटिंग, स्ट्रीट लाइट, मोबाइल फोन, टीवी डिस्प्ले, सोलर सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तक हर जगह किया जा रहा है। इसकी उच्च दक्षता, कम गर्मी और लंबी आयु इसे आधुनिक प्रकाश तकनीक का सबसे विश्वसनीय विकल्प बनाती है।
इस लेख में हम LED की परिभाषा, संरचना, कार्यप्रणाली, विशेषताएँ, उपयोग और लाभ को सरल हिंदी में विस्तार से समझेंगे, ताकि ITI, Polytechnic और इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स के छात्र इसे आसानी से समझ सकें।

📑 Table of Contents


Light Emitting Diode LED symbol and different color LEDs used in electronics


LED की परिभाषा (Definition of LED)


LED (Light Emitting Diode) एक सेमीकंडक्टर युक्ति है जो फॉरवर्ड बायस में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर प्रकाश (Light) उत्पन्न करती है। यह कम बिजली खपत करके अधिक रोशनी देने वाली आधुनिक प्रकाश तकनीक है, जिसका उपयोग लाइटिंग, डिस्प्ले और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में व्यापक रूप से किया जाता है।

"प्रकाश उत्सर्जक डायोड ऐसे P-N संधि डायोड होते हैं जो चालन (अग्र बायस/Forward Bias) की अवस्था में प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं।"

LED की कार्यप्रणाली (Working Principle of LED)


LED एक सेमीकंडक्टर डायोड होता है जो Forward Bias में कार्य करता है। जब LED के एनोड (Positive) पर धनात्मक वोल्टेज और कैथोड (Negative) पर ऋणात्मक वोल्टेज लगाया जाता है, तब इसमें करंट प्रवाहित होने लगता है।
LED के अंदर P-type और N-type सेमीकंडक्टर की परतें होती हैं। जब करंट प्रवाहित होता है, तो N-type से इलेक्ट्रॉन और P-type से होल्स जंक्शन पर आकर आपस में मिलते हैं। इस प्रक्रिया को Recombination कहा जाता है। इस दौरान अतिरिक्त ऊर्जा प्रकाश (Light) के रूप में बाहर निकलती है।
यही कारण है कि जब LED में बिजली दी जाती है तो वह रोशनी उत्सर्जित करता है। LED से निकलने वाले प्रकाश का रंग उस सेमीकंडक्टर सामग्री पर निर्भर करता है जिससे वह बना होता है, जैसे लाल, हरा, नीला आदि।
इस प्रकार, विद्युत ऊर्जा को सीधे प्रकाश ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को ही LED की कार्यप्रणाली कहा जाता है।

LED के वर्किंग डायग्राम में मुख्य रूप से तीन भाग दिखाए जाते हैं –
Anode (P-type), Cathode (N-type) और PN Junction।
जब डायग्राम में LED को DC सप्लाई से जोड़ा जाता है, तो Anode (+) को पॉजिटिव और Cathode (–) को नेगेटिव से कनेक्ट किया जाता है। इस स्थिति को Forward Bias कहा जाता है।
Forward Bias होने पर N-type से Electrons और P-type से Holes जंक्शन की ओर बढ़ते हैं। जब ये आपस में मिलते हैं, तो एक प्रक्रिया होती है जिसे Recombination कहा जाता है। इस प्रक्रिया में अतिरिक्त ऊर्जा निकलती है जो Light (फोटॉन) के रूप में बाहर आती है।
डायग्राम में LED के पास बाहर की ओर बने हुए दो तीर (Arrows) यह दर्शाते हैं कि प्रकाश बाहर की ओर निकल रहा है। यही कारण है कि जब करंट प्रवाहित होता है तो LED चमकने लगता है।
LED से निकलने वाला प्रकाश का रंग उस Semiconductor Material पर निर्भर करता है जिससे LED बना होता है, जैसे लाल, हरा या नीला।
इस प्रकार LED Working Diagram यह स्पष्ट करता है कि कैसे विद्युत ऊर्जा सीधे प्रकाश ऊर्जा में बदल जाती है।

एक अग्र बायस डायोड (फॉरवर्ड बायस/Forward Bias) में जंक्शन के पास वाले क्षेत्र में इलेक्ट्रोनों और होल का पुनः सयोग (Electrons-Hole Recombination) होता रहता है। इस इलेक्ट्रॉन और होल के सयोग से उच्च ऊर्जा स्तर चालन (Higher Energy Level) के चालन बैंड (Conduction Band) से निम्न ऊर्जा स्तर (Lower Energy Level) के संयोजी बैंड (Valence Band) में आता है तो दोनो स्तरो की ऊर्जाओं के अंतर के बराबर ऊर्जा का उत्सर्जन होता है।
यह ऊर्जा ऊष्मा व प्रकाश के रूप में उत्सर्जित होती है। सिलिकॉन व जर्मेनियम में अधिकांश ऊर्जा ऊष्मा के रूप में उत्सर्जित होती है तथा प्रकाश के रूप में उत्सर्जित ऊर्जा नगण्य होती है। इसलिए प्रकाश उत्सर्जक डायोड बनाने में सिलिकॉन व जर्मेनियम का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसके लिए कुछ विशेष प्रकार के अर्धचालक का प्रयोग किया जाता है।
कुछ विशेष प्रकार के अर्धचालक जैसे कि GaAsP (Gallium Arsenide Phosphide/गैलियम आर्सेनाइड फास्फाइड) और GaP (Gallium Phosphide/गैलियम फास्फाइड) में प्रकाश उत्सर्जन काफी मात्रा में होता है इसलिए प्रकाश उत्सर्जक डायोड बनाने में इन पदार्थो का उपयोग किया जाता है।

LED का प्रतीक (Light Emitting Diode Symbol)


LED (Light Emitting Diode) का Symbol इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में उसकी पहचान दिखाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह प्रतीक एक सामान्य डायोड की तरह होता है, जिसमें बाहर की ओर दो तीर (arrows) बने होते हैं जो प्रकाश के उत्सर्जन को दर्शाते हैं। LED Symbol की मदद से किसी भी सर्किट डायग्राम में LED की स्थिति और दिशा को आसानी से समझा जा सकता है, जिससे सही वायरिंग और सुरक्षित कनेक्शन सुनिश्चित होता है।

LED symbol showing light emitting diode with arrows indicating light output
Symbol of Light Emitting Diode

Light Emitting Diode की विशेषताएं (Features of LED)


LED (Light Emitting Diode) अपनी उच्च दक्षता, कम ऊर्जा खपत और लंबी आयु के कारण आधुनिक प्रकाश तकनीक में बहुत लोकप्रिय है। यह तुरंत तेज रोशनी देता है, कम गर्मी उत्पन्न करता है और पारंपरिक बल्बों की तुलना में अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण LED का उपयोग घरेलू, औद्योगिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में तेजी से बढ़ रहा है।
एक सामान्य LED में निम्नलिखित विशेषता होती है:

1. कम फॉरवर्ड वोल्टेज – LED सामान्यतः 1V से 2V के बीच काम करता है, जिससे यह कम बिजली में प्रकाश देता है।
2. कम ऊर्जा खपत – LED बहुत कम पावर पर काम करता है, इसलिए इसमें बिजली की बचत होती है।
3. विभिन्न रंगों में उपलब्ध – LED लाल, हरा, नीला, पीला और सफेद जैसे कई रंगों में उपलब्ध होता है, जिससे इसका उपयोग सजावटी और इंडिकेटर लाइट में किया जाता है।
4. उच्च तापमान सहन क्षमता – LED लगभग 0°C से 75°C तक के तापमान में सही तरीके से काम कर सकता है।
5. मजबूत और टिकाऊ – LED एक shock-resistant device है, इसलिए यह झटकों और कंपन से जल्दी खराब नहीं होता।
6. प्रकाश नियंत्रण की सुविधा – LED की रोशनी को वोल्टेज या करंट बदलकर आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
7. तेज़ स्विचिंग – LED को बहुत तेजी से ON और OFF किया जा सकता है, इसलिए यह डिजिटल सर्किट में उपयोगी है।
8. कम शक्ति व्यय – LED लगभग 1.5 से 2 वोल्ट पर काम करता है, जिससे इसमें बहुत कम बिजली खर्च होती है।
9. छोटा आकार – LED आकार में छोटा होता है, इसलिए कई LED को मिलाकर डिस्प्ले, नंबर और अक्षर बनाए जा सकते हैं।
10. लंबी आयु और कम लागत – LED सस्ता होता है और यह कई वर्षों तक बिना खराब हुए काम कर सकता है।
11. सुरक्षा के लिए रेजिस्टर आवश्यक – LED को सर्किट में जोड़ते समय उसके साथ Series Resistor लगाना जरूरी होता है, ताकि अधिक करंट से LED खराब न हो।

LED के उपयोग (LED Applications)

LED (Light Emitting Diode) एक कम ऊर्जा खपत करने वाला और लंबे समय तक चलने वाला प्रकाश स्रोत है। इसकी तेज रोशनी, कम गर्मी उत्पन्न करने की क्षमता और उच्च दक्षता के कारण आज इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू लाइटिंग, इंडिकेटर, डिस्प्ले और सोलर सिस्टम में व्यापक रूप से किया जाता है। LED आधुनिक तकनीक में ऊर्जा बचत और विश्वसनीय प्रकाश समाधान के रूप में बहुत महत्वपूर्ण बन चुका है। इसी कारण से LED का उपयोग निम्नलिखित स्थानों पर किया जाता है।

1. इंडिकेटर लाइट – इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ON/OFF या स्टेटस दिखाने के लिए LED का उपयोग किया जाता है।
2. डिस्प्ले बोर्ड – डिजिटल घड़ी, कैलकुलेटर, स्कोर बोर्ड और साइन बोर्ड में LED डिस्प्ले लगाए जाते हैं।
3. घरेलू लाइटिंग – घरों में LED बल्ब और ट्यूबलाइट कम बिजली में अधिक रोशनी देते हैं।
4. स्ट्रीट लाइट – सड़कों और हाईवे पर ऊर्जा बचत के लिए LED स्ट्रीट लाइट का प्रयोग किया जाता है।
5. मोबाइल और टीवी स्क्रीन – स्मार्टफोन, LED टीवी और मॉनिटर में LED बैकलाइट के रूप में उपयोग होती है।
6. रिमोट कंट्रोल – टीवी और AC के रिमोट में इंफ्रारेड LED लगी होती है।
7. ऑटोमोबाइल लाइट – कार, बाइक और बस में हेडलाइट, ब्रेक लाइट और इंडिकेटर में LED लगाई जाती है।
8. सोलर लाइट सिस्टम – सोलर लैंप और गार्डन लाइट में LED कम पावर खपत के कारण आदर्श होती है।
9. सजावटी लाइटिंग – त्योहारों, शादी और डेकोरेशन में LED स्ट्रिप और फैंसी लाइट का उपयोग होता है।
10. इलेक्ट्रॉनिक सर्किट – विभिन्न सर्किट में सिग्नल और स्थिति दिखाने के लिए LED का प्रयोग किया जाता है।

सप्त खण्डीय डिस्प्ले (Seven Segment Display)


एलईडी डिस्प्ले कई साइज व आकार में उपलब्ध होता है। सप्त खण्डीय डिस्प्ले में 7 एलईडी को अंक 8 के आकार में लगाया जाता है, अतः वांछित (desirable) एलईडी को जलाकर तथा शेष को बुझाकर 0 से 9 तक कोई भी संख्या डिस्प्ले की जा सकती है।
जैसे– अंक 5 को प्राप्त करने के लिए एलईडी a, b, g, e, d को ऑन तथा एलईडी f और c को ऑफ रखना होगा।
Seven segment display diagram showing LED segments labeled a b c d e f g
Seven Segment Display

LED – Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1. LED क्या है?
LED (Light Emitting Diode) एक सेमीकंडक्टर डिवाइस है जो उसमें करंट प्रवाहित होने पर प्रकाश उत्पन्न करती है।

Q2. LED कैसे काम करता है?
जब LED में फॉरवर्ड बायस में करंट दिया जाता है, तब इलेक्ट्रॉनों और होल्स के मिलन से ऊर्जा निकलती है जो प्रकाश के रूप में दिखाई देती है।

Q3. LED बल्ब पारंपरिक बल्ब से बेहतर क्यों है?
LED कम बिजली खपत करता है, अधिक समय तक चलता है और कम गर्मी पैदा करता है, इसलिए यह पारंपरिक बल्ब से अधिक सुरक्षित और किफायती होता है।

Q4. LED कितने वोल्ट पर काम करता है?
सामान्य LED 1.8V से 3.3V के बीच काम करता है, रंग और प्रकार के अनुसार इसका वोल्टेज बदल सकता है।

Q5. क्या LED AC सप्लाई पर चल सकता है?
सीधे नहीं। LED को DC सप्लाई चाहिए, इसलिए AC पर चलाने के लिए ड्राइवर या रेक्टिफायर सर्किट का उपयोग किया जाता है।

Q6. LED के मुख्य उपयोग क्या हैं?
LED का उपयोग इंडिकेटर लाइट, बल्ब, डिस्प्ले, स्ट्रीट लाइट, मोबाइल स्क्रीन, रिमोट कंट्रोल और सोलर लाइट में किया जाता है।

Q7. क्या LED आंखों के लिए सुरक्षित है?
अच्छी गुणवत्ता वाला LED सही ब्राइटनेस पर उपयोग किया जाए तो आंखों के लिए सुरक्षित होता है।

Q8. LED का पूरा नाम (full form) क्या होता है?
LED का पूरा नाम Light Emitting Diode (प्रकाश उत्सर्जक डायोड) होता है?

Conclusion – Light Emitting Diode (LED)

Light Emitting Diode (LED) आज की आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल दुनिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक बन चुका है। इसकी कम बिजली खपत, लंबी उम्र, तेज रोशनी और विश्वसनीयता के कारण इसका उपयोग इंडिकेटर लाइट, डिस्प्ले, स्ट्रीट लाइट, मोबाइल, टीवी और सोलर सिस्टम तक में किया जाता है।
इस लेख में हमने LED की संरचना, कार्यविधि, प्रतीक और विशेषताओं को सरल हिंदी में समझा, जिससे छात्रों, ITI, Polytechnic और तकनीकी पाठकों को इसे आसानी से समझने में मदद मिले।

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